प्रकृति संरक्षण में स्वयं को सम्मिलित करे....

 


               मानवीय गतिविधियों के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ा है. यह अब इतनी भयावह स्थिति में पहुंच चुंका है की कई वनस्पति और जीव जंतुओं की प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर है. जिसका कुप्रभाव हम पर ही हो रहा है. अनियमित मौसम चक्र और बढ़ता प्रदूषण हमारे लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है. हालांकि प्रकृति ने हमें इसके संकेत कई बार दिए है किन्तु हम हर बार इनकी अनदेखी करते है और बड़ी प्राकृतिक आपदा झेलते है . तब हम हमारा घुस्सा प्रकृति पर निकालते है और इसे कोसने लगते है किन्तु हम यह भूल जाते है की प्रकृति ने जो किया है वह संकेत है की हम अब भी सम्भल जाए और प्रकृति संरक्षण करके आपदाओं से बचे. प्रकृति सुरक्षित रहेगी तो हम न सिर्फ बड़ी प्राकृतिक आपदों से बच सकेंगे बल्कि कई तरह की गंभीर बिमारियों से भी हमें मुक्ति मिलेगी. क्योंकि स्वच्छ वातावरण स्वस्थ्य शरीर का निर्माण करता है. इसके साथ ही कई जीव जंतुओं की प्रजातियां भी विलुप्त होने से बच सकेंगी. प्राकृतिक संसाधन भी बने रहेंगे जिनका हम सीमित तरीके से उपयोग कर लाभ ले सकेंगे. इसके लिए जरुरी है की हम स्वयं प्रकृति संरक्षण में सम्मिलित हो और ऐसे सभी क्रियाकलाप करना बंद कर दे जिससे की प्रकृति या पर्यावरण को क्षति पहुंचती हो.




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