भारतीय संस्कृति और राष्ट्र भावना को जगाता है दूरदर्शन

 

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           दूरदर्शन द्वारा सूचना देने के उद्देश्य से 15 अगस्त 1965 को प्रथम समाचार बुलेटिन का प्रसारण  किया गया था और यह आज भी निरंतर जारी है. वर्तमान समय में निजी टीवी पत्रकारिता शोर शराबे और टीआरपी बटोरने का केंद्र बन चुका है. वहीं आज भी दूरदर्शन सूचना, संदेश व मनोरंजन के साथ-साथ पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने का कार्य बखूबी निभा रहा है. दूरदर्शन चौबीस घंटे के प्राइवेट चैनलों की बिना सिर पैर की ख़बरों के बीच अपनी प्रासंगिकता व कार्यशैली के कारण अडिग रूप से मजबूती से टिका हुआ है. क्योंकि यह मनोरंजन के साथ-साथ लोगों को शिक्षित व नैतिक बातों के आग्रह के लिए भी प्रेरित करता है. दूरदर्शन पर आने वाले बेहतर विज्ञापनों जैसे की ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ ने जहाँ समाज को एकता के संदेश के साथ जोड़ा, वहीं ‘बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर’ के द्वारा अपनी व्यावसायिक क्षमता का परिचय भी करवाया है. भारत में किसानों तक कृषि जानकारी को सर्वप्रथम पहुंचाने का काम भी दूरदर्शन ने किया. सन् 1966 में ‘कृषि दर्शन’ कार्यक्रम के द्वारा देश में हरित क्रांति के सूत्रपात का केंद्र बिंदु भी दूरदर्शन ही बना. वास्तव में अर्थपूर्ण व समसामयिक कार्यक्रमों और भारतीय संस्कृति को बचाए रखते हुए राष्ट्र भावना को जगाने में दूरदर्शन ने अहम भूमिका निभायी है. प्रारंभ से लेकर आज तक दूरदर्शन ने अपने स्थापित मूल्यों व लक्ष्यों को न केवल प्राप्त किया है बल्कि उनकी सार्थकता को कायम भी रखा है.

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  1. दूरदर्शन को देखकर हम बडे़ हुए,, धन्यवाद दूरदर्शन

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