नासा का नया उपग्रह लॉन्चिंग की तैयारी में

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  Photo Credit: IANS               अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा वैश्विक समुद्र तल की निगरानी करने के लिए एक उपग्रह प्रक्षेपित करने के लिए तैयार है. वैश्विक समुद्र स्तर एक साल में लगभग 3.3 मिलीमीटर बढ़ रहा है. सेंटिनल -6 नाम का यह उपग्रह बढ़ते समुद्र के स्तर का दस्तावेजीकरण करने के नासा के 3 दशक लंबे काम को जारी रखेगा. इसके बाद 2025 में इस उपग्रह का काम इसका जुड़वां सेंटिनल-6 बी द्वारा किया जाएगा.           नासा ने कहा, "इस जोड़ी को वैश्विक समुद्री सतह की ऊंचाई मापने हमारे लगभग 30 साल लंबे रिकॉर्ड को आगे बढ़ाने का काम सौंपा गया है. उपग्रहों में लगे उपकरण वायुमंडलीय डेटा भी देंगे जो मौसम के पूवार्नुमान, जलवायु मॉडल और तूफान की ट्रैकिंग में सुधार करेंगे."           उपग्रहों, एयरबोर्न मिशन, जहाजों के माप और सुपर कंप्यूटरों के जरिए नासा दशकों से समुद्र के स्तर में वृद्धि की निगरानी कर रहा है. वैश्विक समुद्र स्तर एक साल में लगभग 3.3 मिलीमीटर यानि 0.13 इंच बढ़ रहा है. नासा के प्रोग्राम मैनेजर विनोगड्रोवा शिफर ने कहा है की, "हम इस बड़े लक्ष्य को लेकर एकजुट हैं. समुद्र स्तर कई वि

दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने का सराहनीय प्रयास


जनगणना 2011 के अनुसार भारत में कुल 2.68 करोड़ लोग विकलांगता के शिकार हैं. ऐसे लोगों को एक सामान्य जीवन से जोडऩे के लिए सरकारी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है. परन्तु नई दिल्ली वाई-एम-सी-ए डिवीजन ने 1980 में ऐसे लोगों के लिए  ‘विशेष शिक्षा’  देने की शुरूआत की है जिसमें  छात्रों को अत्यंत कम शुल्क में अच्छी शिक्षा मिले और आर्थिक रूप से सक्षम नहीं छात्रों को संस्था द्वारा छात्रवृत्ति भी दी जाती है. वाई-एम-सी-ए ने इस ओर ठोस कदम उठाया और इसके अंतर्गत दिव्यांग बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा ग्रहण करने का लाभ दिया ताकि दिव्यांग बच्चे भी अन्य बच्चों की तरह न सिर्फ शिक्षा ग्रहण कर सकें बल्कि इससे उनका मानसिक विकास भी हो. इसके कारण जब सकारात्मक आया तो इसे जारी रखा गया साथ ही दिव्यांगों के विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ वार्षिक क्षमता महोत्सव का आयोजन किया गया ताकि सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य कार्यक्रम जैसे- संगीत, नाटक, नृत्य, पेंटिग, हस्तकला-शिल्पकला के द्वारा वह अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें और उनके व्यक्तित्व का विकास हो. इन सब के द्वारा वाई-एम-सी-ए के कार्यकर्ता दिव्यांग बच्चों के कौशल को पहचानने और उन्हें और आगे ले जाने का काम कर रहे हैं. जिससे की ‘विशेष शिक्षा’ के अंतर्गत शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चे अपने आत्मविशवास के बल पर जीवन में आगे बढ़ सकें.

Comments

  1. मानसिक विकलांग के साथ किसी को हमदर्दी नहीं होती।एक बंद कमरे में उपेक्षित व अपमानित जिन्दगी जीते हैं। दिव्यागो की तरह इनको भी राहत मिलनी चाहिए ।पैंशन व पुनर्वास की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि ये भी आत्मसम्मान के साथ जी सकें।

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